(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

सभापर्व ~ महाभारत | Mahabharat Sabha Parv In Hindi


॥ श्रीः ॥
2.26. अध्यायः 026
Mahabharata - Sabha Parva - Chapter Topics
युधिष्ठिराज्ञया दिग्विजयार्थं निर्गतानामर्जुनादीनां सङ्क्षेपेण दिग्विजयक थनम्॥
Mahabharata - Sabha Parva - Chapter Text

वैशम्पायन उवाच।

`ऋषेस्तद्वचनं स्मृत्वा निशश्वास युधिष्ठिरः।
धर्म धर्मभृतां श्रेष्ठः कर्तुमिच्छन्परन्तपः। 2-26-1(12413)
तस्येङ्गितज्ञो बीभत्सुः सर्वशस्त्रभृतां वरः।
संविवर्तयिषुः कामं पावकात्पाकशासनिः'॥ 2-26-2(12414)
प्राप्तं प्राप्य धनुः श्रेष्ठमक्षय्यौ च महेषुधी।
रथं ध्वजं सभां चैव युधिष्ठिरमभाषत॥ 2-26-3(12415)
अर्जुन उवाच। 2-26-4x(1434)
धनुरस्त्रं शरा वीर्यं पक्षो भूमिर्यशो बलम्।
प्राप्तमेतन्मया राजन्दुष्प्रापं यदभीप्सितम्॥ 2-26-4(12416)
तस्य कृत्यमहं मन्ये कोशस्य परिवर्धनम्।
करमाहारयिष्यामि राज्ञः सर्वान्नृपोत्तम॥ 2-26-5(12417)
विजयाय प्रयास्यामि दिशं धनदपालिताम्।
तिथावथ मुहूर्ते च नक्षत्रे चाभिपूजिते॥ 2-26-6(12418)
वैशम्पायन उवाच। 2-26-7x(1435)
धनञ्जयवचः श्रुत्वा धर्मराजो युधिष्ठिरः
स्निग्धगम्भीरनादिन्यां तं गिरा प्रत्यभाषत॥ 2-26-7(12419)
स्वस्ति वाच्यार्हतो विप्रान्प्रयाहि भरतर्षभ।
दुर्हृदामप्रहर्षाय सुहृदां नन्दनाय च॥ 2-26-8(12420)
विजयस्ते ध्रुवं पार्थ प्रियं काममवाप्स्यसि।
इत्युक्तः प्रययौ पार्थः सैन्येन महता वृतः॥ 2-26-9(12421)
अग्निदत्तेन दिव्येन रथेनाद्भुतकर्मणा।
तथैव भीमसेनोऽपि यमौ च पुरुषर्षभौ॥ 2-26-10(12422)
ससैन्याः प्रययुः सर्वे धर्मराजेन पूजिताः।
दिशं धनपतेरिष्टामजयत्पाकशासनिः॥ 2-26-11(12423)
भीमसेनस्तथा प्राचीं सहदेवस्तु दक्षिणाम्।
प्रतीचीं नकुलो राजन्दिशं व्यजयतास्त्रवित्॥ 2-26-12(12424)
खाण्डवप्रस्थमध्यस्थो धर्मराजो युधिष्ठिरः।
आसीत्परमया लक्ष्म्या सुहृद्गणवृतः प्रभुः॥ ॥ 2-26-13(12425)

इति श्रीमन्महाभारते सभापर्वणि दिग्विजयपर्वणि षड्विंशोऽध्यायः॥ 26॥

Mahabharata - Sabha Parva - Chapter Footnotes
2-26-13 खाण्डवप्रस्थं खाण्डवदाहेन ख्यापितस्थानम्॥ 13॥


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